सरस्वती जी की वीना

सरस्वती मा हिंदू लोगो के लिए बहुत ही प्रभावशाली देवियो मे से एक है| हिंदुओं के लिए सरस्वती मा ज्ञान और पवित्रता की प्रतिबिंब है. संस्कृत भाषा के प्रसीध कवि दंडिन सरस्वती जी को “सर्वशुक्ला सरस्वती” (पूरी सफेद सरस्वती) कह के उल्लेखित करते है|

फाल्गुन मास (फ़रवरी-मार्च) मे आज भी भारत के कही हिस्सो मे सरस्वती जी की वार्षिक पूजा होती है| यह पूजा सैक्षणिक संस्थानो मे खास रूप से मनाई जाती है| सैक्षणिक संस्थानो मे सरस्वती मा का दर्जा बाकी सारे  देवी देवताओ से उच्च माना जाता है|

सरस्वातीजी एक सर्वागुण संपन्न देवी है| सरस्वतीजी के प्रतिमा मे आप हमेशा एक और वस्तु पर ध्यान देंगे, वो वस्तु एक वीणा है| सरस्वातीजी वीणाप्रिय है| ऋषि याज्ञवल्क्या के अनुसार “जो वीना के कुशल कला मे निपुण है, उसे अती सुलभ मोक्षप्राप्ति होती है|

सरस्वती जी की वीना हमे काई चीज़ो का निरूपण करती है|

सरस्वती जी की वीना
Saraswati maa Statue

१) वीना कोई मामूली संगीत उप्करन नही है| वीना सर्व-ज्ञान (धार्मिक और धर्म निरपेक्ष, आध्यात्मिक और सांसारिक) का प्रतीक है. जब वीना  बजती है, उससे उत्पान होने वेल राग-ताल-लय ऐसे है , जैसे के सारे दिशाओ से ज्ञान सुधा टूट के बरस रही हो|

२)सरस्वतीजी वीना के ऊपरी भाग को अपने बायां हाथ से पकड़ती है , और वीना के निचला हिस्सा को अपने दायाँ हाथ से| यह ज्ञान के हर पहलू पे पूरा नियंत्रण और, और उसको उपयोग करने की क्षमता को प्रकट करती है|

३)सरस्वती जी की वीना को देवत्वका प्रतीक माना जाता है, वीना का हर अंग किसी ना किसी देवी देवता का स्वरूप है| जैसे वीना का गरदन शिवजी है , और तार पर्वथीजी, सेतु लक्ष्मी का प्रतिबिंब है, तो छोटी तूँबा भ्रामा का| और इन सब के भीच मे लहराता शरीर सरस्वती| इस्सिलिये वीना को हर सुख-संतूस्ती का मूल बताया जाता है|

४) वीना संपपोर्ना भारतिया संगीत-कला को दर्शाती है, और सारे संगीतमय तार साधानो का समन्य नाम बन चुकी है| असल वीना  की ख़ासियत यहाई  के, एक श्रुति वीना से २२ श्रुति एक ही समाया पेर उत्पन्ना होती है|

५) वीना हुमारे जीवन का प्रतिरूप है, और उसके तार हुमारे विभिन्न भावनाओ को संबोधित करते है| वीना के तारो के लय मानव ध्वनि (श्त्रि) के काफ़ी निकट है|

६) वीना की आवाज़ भ्रमांड निर्माण के मूलभूत कंपनो को संबोधित है| ऐसे ही कंपनो से भ्रमंड को जीवन निर्मित करनेकी ऊर्जा शक्ति (प्राना) मिली थी| भ्रामा-पुत्रा नारादा के पास के हमेशा एक वीना  होती है|

७) वीना की आवाज़ मंत्रो के लय जैसे है, जिनो ने भ्रमांड निर्माण के क्षण उत्पन्ना हुए विशृंखलता को जीवन समर्थ बनाया|

८)वीना  के तरंग पवित्र ज्ञान बनके ऐसे बहते है , जैसे सागर मे पानी बहती है|

९) सरस्वती जी की वीना भ्रमंड की सबसे विकसित संगीतमय तार साधन है|

१०) वीना  के तार हमारे प्राकृतिक क्रिया अंगों को संबोधित करते है| वीना  के तारो पे नियंत्रण का मतलब है, अपने होश पे नियंत्रण एवं विवेक|

११) हमे कुशलता और कलात्मक र्रोप सी हमारा ज्ञान बाटना चाहिए| जैसे  कोई वीना बजा रहा हो|

१२)वीना का अध्यात्मिक नाम कच्छपी (मादा कछुआ)|

१३) जैसे मादा कछुआ सागर के तट पर अपने आंडो को रेत मे छुपा के अपनी अन्या कर्तव्यों को पूरा करने जाती है और हमेशा तट मे रक्खे अपने आंडो पे एक नज़र रक्ती है| वैसे ही सरस्वती मा भी अपने बाकचो का पालन-पोषण करती है|

१४) वीना को भारत के  कही हिस्सो मे मुक़चंदी भी बोलते है|